राजस्थानी मांय कविता
'ऊजळौ मारग'
'ऊजळौ मारग'
कुणसे दिन में किण पागोठै,
पापाड़ै सूँ पग मांडया।
परमाणां री लांबी चौड़ी'
लिस्ट कठै सूँ अब ला दयां ।।
पापाड़ै सूँ पग मांडया।
परमाणां री लांबी चौड़ी'
लिस्ट कठै सूँ अब ला दयां ।।
अंतर रा आंटा रै मांई ,
चोरी छुरियाँ चळकावै,
पीठां गैलां करै पिचरका,
परतख बोल ना पावै है।
चोरी छुरियाँ चळकावै,
पीठां गैलां करै पिचरका,
परतख बोल ना पावै है।
जीया जूण रा जंजाळां में,
गिरबौ गैलां रह जासी।
थोथी बातां दिन थोड़ां री,
अकल भचीड़ै आ जासी।।
गिरबौ गैलां रह जासी।
थोथी बातां दिन थोड़ां री,
अकल भचीड़ै आ जासी।।
प्यासौ मिरगौ पेट कारणै,
घणा घुमेरा घालै ।
पलक झबूकै पल्टयौ आसी,
सिंघ झफीड़ा कुण झालै ।।
घणा घुमेरा घालै ।
पलक झबूकै पल्टयौ आसी,
सिंघ झफीड़ा कुण झालै ।।
लांबा मारग,भुरट भलेरा,
कांटा मन में चुभ जासी।
नेकी कर कर नांख कुआं में,
पुण्य पखालां पा जासी।।
कांटा मन में चुभ जासी।
नेकी कर कर नांख कुआं में,
पुण्य पखालां पा जासी।।
आडंबर सै अकड़ रहया है,
आसै-पासै, इण बस्ती।
नज़रां नीच्या नाक चोरसी,
सो मत ऊंडी मस्ती।।
आसै-पासै, इण बस्ती।
नज़रां नीच्या नाक चोरसी,
सो मत ऊंडी मस्ती।।
ऊँची सोच्यां उजळौ मारग,
छोट-मोट सै रह जावै।
पग-पग दूजी पीड़ पखाळै,
राम भरोसौ रह जावै।।
छोट-मोट सै रह जावै।
पग-पग दूजी पीड़ पखाळै,
राम भरोसौ रह जावै।।
---तेज़स...
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