सूफ़ी दर्शन को समर्पित दोहे
🔰"अनहद नाद सप्तक"🔰
(Sufism philosophy)
लहरी रंग लगावणी,पहरी आठौं पौर।
गहरी बाजै गागरी,सुण लै बहरी शौर।।
नाखूँ झाड़ा नैह रा,राखूँ ओट छिपाय।
दाखूँ अरजी दीवळा,आप उजाळौ आय।।
भरली गांठी बाथ में,करली काठी डोळ।
धरली धीरप ध्यान सूँ,परली लांघण पौळ।।
सुण अणदीठा सायबा,भर मत रै भरमास।
तू कहसी आ तावड़ौ,म्हैं कहसूँ उजियास।।
नगटां आळै नैह सूँ,मोळौ राख्यौ मैळ।
बुझगी सचरी बातियाँ,खलक करै अब खेल।
पथ में पागी पाँतरै,आगै घोर अँधार।
चाँदौ आभै चमकसी,धेजौ हिवड़ै धार।।
रंग चढ़ायौ राजवी,दंग भयो दरवेश।
भंग चढ़ाई भांत री,चंग भयो चितदेश।।
---तेज़स...
(Sufism philosophy)
लहरी रंग लगावणी,पहरी आठौं पौर।
गहरी बाजै गागरी,सुण लै बहरी शौर।।
नाखूँ झाड़ा नैह रा,राखूँ ओट छिपाय।
दाखूँ अरजी दीवळा,आप उजाळौ आय।।
भरली गांठी बाथ में,करली काठी डोळ।
धरली धीरप ध्यान सूँ,परली लांघण पौळ।।
सुण अणदीठा सायबा,भर मत रै भरमास।
तू कहसी आ तावड़ौ,म्हैं कहसूँ उजियास।।
नगटां आळै नैह सूँ,मोळौ राख्यौ मैळ।
बुझगी सचरी बातियाँ,खलक करै अब खेल।
पथ में पागी पाँतरै,आगै घोर अँधार।
चाँदौ आभै चमकसी,धेजौ हिवड़ै धार।।
रंग चढ़ायौ राजवी,दंग भयो दरवेश।
भंग चढ़ाई भांत री,चंग भयो चितदेश।।
---तेज़स...
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